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(All) Humayun Ahmed Books Pdf Free Download | হুমায়ুন আহমেদের বই pdf free download

আপনাদের অতি অনুরোধের বই Humayun Ahmed Books Pdf Free Download | হুমায়ুন আহমেদের বই pdf free download লিংক নিয়ে চলে এলাম আজকে।

Humayun Ahmed Books Pdf Free Download | হুমায়ুন আহমেদের বই pdf free download

1. Aj Ami Kothao Jabo Na (আজ আমি কোথাও যাব না)

2. Aj Chitrar Biye (আজ চিত্রার বিয়ে)

3. Aj Dupure Tomar Nimantron (আজ দুপুরে তোমার নিমন্ত্রণ)

4. Achinpur (অচিনপুর)

5. Adbhut Shob Golpo (অদ্ভুত সব গল্প)

6. Aguner Poroshmoni (আগুনের পরশমণি)

7. Akash Jora Megh (আকাশ জোড়া মেঘ)

8. Amader Shada Bari (আমাদের শাদা বাড়ি)

9. Omanush (অমানুষ)

10. Amar Ache Jol (আমার আছে জল)

11. Amar Chelebela (আমার ছেলেবেলা)

12. Ami Ebong Koyekti Projapoti (আমি এবং কয়েকটি প্রজাপতি)

13. Amra Keu Bashai Nei (আমরা কেউ বাসায় নেই)

14. Andhokarer Gaan (অন্ধকারের গান)

15. Anil Bagchir Ekdin (অনিল বাগচীর একদিন)

16. Anyodin (অন্যদিন)

17. Opekkha (অপেক্ষা)

18. Aporahnyo (অপরাহ্ণ)

19. Ashabori (আশাবরী)

20. Asmanira Tin Bon (আসমানীরা তিন বোন)

21. Ayna Ghor (আয়নাঘর)

22. Ayomoy (অয়োময়)

23. Badol Diner Dwitiyo Kodom Phul (বাদল দিনের দ্বিতীয় কদম ফুল)

24. Badshah Namdar (বাদশাহ নামদার)

25. Bashanta Bilap (বসন্ত বিলাপ)

26. Bashor (বাসর)

27. Bohubrihi (বহুব্রীহি)

28. Brikkhakatha (বৃক্ষকথা)

29. Brishti Bilash (বৃষ্টি বিলাস)

30. Brishti O Meghomala (বৃষ্টি ও মেঘমালা)

31. Chander Aloy Koyekjon Jubok (চাঁদের আলোয় কয়েকজন যুবক)

32. Chayabithi (ছায়াবীথি)

33. Cheleta (ছেলেটা)

34. Chobi Bananor Golpo (ছবি বানানোর গল্প)

35. Chokkhe Amar Trishna ( চক্ষে আমার তৃষ্ণা)

36. Choto Golpo (ছোট গল্প)

37. Dar Kaker Shongsar Kingba Majhe Majhe Tobo Dekha Pai (দাঁড়কাকের সংসার কিংবা মাঝেমাঝে তব দেখা পাই)

38. Dekha Na Dekha (দেখা না-দেখা)

39. Deyal (দেয়াল)

40. Dighir Jole Kar Chaya Go (দিঘির জলে কার ছায়া গো)

41. Diner Sheshe (দিনের শেষে)

42. Doulot Shahr Adbhut Kahini (দৌলত শাহ’র অদ্ভুত কাহিনী)

43. Dui Duari ( দুই দুয়ারী)

44. Ei Ami (এই আমি)

45. Ei Megh Rodro Chaya (এই মেঘ রৌদ্র ছায়া)

46. Ekti Cycle Ebong Koyekti Dahuk Pakhi (একটি সাইকেল এবং কয়েকটি ডাহুক পাখি)

47. Ele-Bele. 1 (এলেবেলে – ১)

48. Ele-Bele. 2 (এলেবেলে – ২)

49. Ghetuputro Komola (ঘেটুপুত্র কমলা)

50. Gouripur Jongshon (গৌরীপুর জংশন)

51. Humayun Ahmed-Er Premer Golpo (হুমায়ূন আহমেদের প্রেমের গল্প)

52. Jalil Shaheber Petition (জলিল সাহেবের পিটিশন)

53. Jibonkrishno Memorial High School (জীবনকৃষ্ণ মেমোরিয়াল হাই স্কুল)

54. Jochna O Jononir Golpo (জোছনা ও জননীর গল্প)

55. Jodiyo Shondhya (যদিও সন্ধ্যা)

56. Jol Jochna (জল জোছনা)

57. Jol Poddo (জলপদ্ম)

58. Kalo Jadukor (কালো যাদুকর)

59. Ke Kotha Koi (কে কথা কয়)

60. Kichu Shoishob (কিছু শৈশব)

61. Kichukkhan (কিছুক্ষণ)

62. Kobi 1, 2 & 3 (কবি – ১, ২, ৩)

63. Kocchop Kahini (কচ্ছপ কাহিনী)

64. Kothau Keu Nei (কোথাও কেউ নেই)

65. Koto Na OsruJol (কত না অশ্রুজল)

66. Krishno Pokkho (কৃষ্ণপক্ষ)

67. Kudduser Ekdin (কুদ্দুসের একদিন)

68. Kuhok (কুহক)

69. Kuhurani (কুহুরানী)

70. Kutu Mia (কুটু মিয়া)

71. Lilaboti Full (লীলাবতী)

72. Lilaboti Part 1 (লীলাবতী – ১)

73. Lilaboti Part 2 ( লীলাবতী – ২)

74. Lilaboti Part 3 ( লীলাবতী – ৩)

75. Lilua Batash (লিলুয়া বাতাস)

76. Maddhanya ( Part 1 & 2 ) – মধ্যাহ্ন (১ , ২)

77. Magic Munshi (ম্যাজিক মুনশি)

78. Uthon Periye Dui Pa (উঠোন পেরিয়ে দুই পা)

79. Matal Haowa (মাতাল হাওয়া)

80. Megh Boleche Jabo Jabo (মেঘ বলেছে যাব যাব)

81. Mirar Gramer Bari (মীরার গ্রামের বাড়ী)

82. Mojar Bhoot (মজার ভূত)

83. Mrinmoyee (মৃন্ময়ী)

84. Mrinmoyir Mon Bhalo Nei (মৃন্ময়ীর মন ভালো নেই)

85. Nabani (নবনী)

86. Nalini Babu B. Sc (নলিনী বাবু B. Sc)

87. Neel Aporajita (নীল অপরাজিতা)

88. Neel Hati (নীল হাতি)

89. Neel Manush (নীল মানুষ)

90. Nirbashon (নির্বাসন)

91. Nondito Noroke (নন্দিত নরকে)

92. Paap (পাপ)

93. Pakhi Amar Ekla Pakhi (পাখি আমার একলা পাখি)

94. Parapar (পারাপার)

95. Parul O Tinti Kukur (পারুল ও তিনটি কুকুর )

96. Payer Tolay Khorom (পায়ের তলায় খড়ম)

97. Pencil-e Aka Pori (পেন্সিলে আঁকা পরী)

98. Pipilika (পিপীলিকা)

99. Poka (পোকা)

100. Priyotomeshu (প্রিয়তমেষু)

101. Putro Nishad (পুত্র নিষাদ)

102. Raboner Deshe Ami Ebong Amra (রাবণের দেশে আমি এবং আমরা)

103. Rodon Bhora E Boshonto (রোদনভরা এ বসন্ত)

104. Rosh Kosh Shingara Bulbuli Mostok (রস, কষ, শিঙাড়া, বুলবুলি, মস্তক)

105. Rumali (রুমালী)

106. Rupa (রূপা)

107. Rupar Palonko (রূপার পালঙ্ক)

108. Sajghor (সাজঘর)

109. Sanaullar Mohabipod (সানাউল্লার মহাবিপদ)

110. Shankhoneel Karagar (শঙ্খনীল কারাগার)

111. She O Nortoki (সে ও নর্তকী)

112. Shedin Choitromash (সেদিন চৈত্রমাস)

113. Shob Jatra (শবযাত্রা)

114. Shobai Geche Bone (সবাই গেছে বনে)

115. Shokol Kata Dhonno Kore (সকল কাঁটা ধন্য করে)

116. Shunya (শূন্য)

117. Shurjer din (সূর্যের দিন)

118. Shyamol Chaya (শ্যামল ছায়া)

119. Shourov (সৌরভ)

120. Tara Tin Jon (তারা তিন জন)

121. 1971

122. Tetul Bone Jochna (তেতুল বনে জোছনা)

123. The Exorcist (দি একসরসিস্ট)

124. Tithir Neel Toale (তিথির নীল তোয়ালে)

125. Tomake (তোমাকে)

126. Tumi Amay Dekechile Chutir Nimontrone (তুমি আমায় ডেকেছিলে ছুটির নিমন্ত্রণে)

127. Uralponkhi (উড়ালপঙ্খি)

128. Quantum Roshayon (কোয়ান্টাম রসায়ন)

Himu Series Books PDF Download | হিমু সমগ্র বই PDF Download

01. Moyurakkhi (ময়ূরাক্ষী)

02. Dorjar Opashe (দরজার ওপাশে)

03. Himu (হিমু)

04. Parapar (পারাপার)

05. Ebong Himu (এবং হিমু …)

06. Himur Hate Koyekti Neel Poddo (হিমুর হাতে কয়েকটি নীলপদ্ম)

07. Himur Ditiyo Prohor (হিমুর দ্বিতীয় প্রহর)

08. Himur Rupali Ratri (হিমুর রূপালী রাত্রি)

09. Ekjon Himu Koyekti Jhi Jhi Poka (একজন হিমু কয়েকটি ঝিঁ ঝিঁ পোকা)

10. Tomader Ei Nogore (তোমাদের এই নগরে )

11. Chole Jay Boshonter Din (চলে যায় বসন্তের দিন)

12. She Ashe Dhire (সে আসে ধীরে)

13. Himu Mama (হিমু মামা)

14. Angul Kata Joglu (আঙ্গুল কাটা জগলু)

15. Holud Himu Kalo Rab (হলুদ হিমু কালো র‍্যাব)

16. Aaj Himur Biye (আজ হিমুর বিয়ে)

17. Himu Remand-e (হিমু রিমান্ডে)

18. Himur Ekanto Sakkhatkar O Onnannyo (হিমুর একান্ত সাক্ষাতকার ও অন্যান্য)

19. Himur Modhyadupur (হিমুর মধ্যদুপুর)

20. Himur Babar Kothamala (হিমুর বাবার কথামালা)

21. Himur Neel Jochna (হিমুর নীল জোছনা)

22. Himur Ache Jol (হিমুর আছে জল)

See also  [PDF] থ্রিলার বই PDF Download | Bangla Thriller Books PDF Download । সাইকোলজিকাল থ্রিলার বই PDF Download

23. Himu Ebong Ekti Russian Pori (হিমু এবং একটি রাশিয়ান পরী)

24. Himu Ebong Harvard Ph.D. Boltu Bhai (হিমু এবং হার্ভার্ড পিএইচ.ডি বল্টু ভাই)

25. Moyurakkhir Tire Prothom Himu (ময়ূরাক্ষীর তীরে )

Misir Ali All Books PDF Download | মিসির আলী সিরিজ বই PDF Download

01. দেবী (Devi)

02. নিশীথিনী (Nishithini – Devi Part 2)

03. নিষাদ (Nishad)

04. অন্যভুবন (Onno Bhubon)

05. বৃহন্নলা (Brihonnola)

06. ভয় (Bhoy)

07. বিপদ (Bipod)

08. অনীশ (Onish)

09. মিসির আলির অমিমাংসিত রহস্য (Misir Alir Omimangshito Rohoshsho)

মিসির আলি অমনিবাস ২ (Misir Ali Omnibus 2)

10. আমি এবং আমরা (Ami Ebong Amra)

11. তন্দ্রাবিলাস (Tondrabilash)

12. আমিই মিসির আলি (Ami-e Misir Ali)

13. বাঘবন্দি মিসির আলি (Bagh-Bondi Misir Ali)

14. কহেন কবি কালিদাস (Kohen Kobi Kalidash)

মিসির আলি অমনিবাস ৩ (Misir Ali Omnibus 3)

15. হরতন ইশকাপন (Horton Ishkapon)

16. মিসির আলির চশমা (Misir Alir Choshma)

17. মিসির আলি! আপনি কোথায়? (Misir Ali! Apni Kothai?)

18. Misir Ali Unsolved

19. পুফি (Pufi)

20. যখন নামিবে আঁধার (Jokhon Namibe Adhar)

মিসির আলি সমগ্র (Misir Ali Shomogro)

1. মিসির আলি অমনিবাস ১ (Misir Ali Omnibus 1)

2. মিসির আলি অমনিবাস ২ (Misir Ali Omnibus 2)

3. মিসির আলি অমনিবাস ৩ (Misir Ali Omnibus 3)

Shuvro All Books PDF Download | শুভ্র সিরিজ বই PDF Download

01. মেঘের ছায়া (Megher Chaya)

02. দারুচিনি দ্বীপ (Daruchini Dip)

03. রূপালী দ্বীপ (Rupali Dip)

04. শুভ্র (Shuvro)

05. এই শুভ্র! এই (Ei Shuvro Ei)

06. শুভ্র গেছে বনে (Shuvro Geche Bone)

Science Fiction (সায়েন্স ফিকশন) Books By Humayun Ahmed PDF Download

সায়েন্স ফিকশন সমগ্র ১(Science Fiction Shomogro 1)

01. Tomader Jonno Bhalobasha (তোমাদের জন্য ভালোবাসা)

02. Tara Tin Jon (তারা তিনজন)

03. Onnobhubon (অন্য ভূবন)

04. Ireena (ইরিনা)

05. Anonto Nokkhotro Bithi (অনন্ত নকত্রবীথি)

06. Kuhok (কুহক)

সায়েন্স ফিকশন সমগ্র ২(Science Fiction Shomogro 2)

07. Fiha Shomikoron (ফিহা সমীকরন)

08. Shunno (শূন্য)

09. Nee (নি)

10. Tahara (তাহারা)

11. Poresher Hoilda Bari (পরেশেয় হইলদা বড়ি)

12. Ayna (আয়না)

13. Newtoner Bhul Shutro (নিউটনের ভুল সুত্র)

14. Jontro (যন্ত্র)

15. Nimoddhoma (নিমধ্যমা)

সায়েন্স ফিকশন সমগ্র ৩(Science Fiction Shomogro 3)

16. Omega Point (ওমেগা পয়েন্ট)

17. Ema (ইমা)

18. Ditiyo Manob (দ্বিতীয় মানব)

19. Ahok (অহক)

20. Jadukor (জাদুকর)

21. Kudduser Ekdin (কুদ্দুসের একদিন)

22. Shomporko (সম্পর্ক)

বই: অনন্ত নক্ষত্র বীথি
লেখক: হুমায়ূন আহমেদ
প্রকাশনী:কাকলী প্রকাশনী
মূল্য:১২০ টাকা
জনরা: সায়েন্স ফিকশন
মহাশূন্য প্রকল্প থেকে প্রতি ছ’বছরে একটি বিশেষ মহাকাশযান পাঠানো হয়। এই মহাকাশযানগুলি হাইপার ডাইভ সম্পন্ন। এবারে সাতজন বিশেষ ক্রুদের সঙ্গে যাচ্ছে একজন ইএসপি ক্ষমতা সম্পন্ন অনভিজ্ঞ ও সাধারণ একজন মানুষ। মানুষটি রোমাঞ্চপ্রিয় নয়, নিজের গৎবাধা জীবন আর প্রিয়তমা নিকিকাকে ছেড়ে সে কিছুতেই যেতে চায় না কোনো অনিশ্চিত যাত্রায়। কিন্তু সে নিরূপায়, নিতান্তই অনিচ্ছায় মহাকাশযানে চেপে বসলো। মহাকাশযানের গন্তব্য এন্ড্রোমিডা নক্ষত্রপুঞ্জ। যাত্রার মাঝপথে বাঁধলো বিপত্তি। অজানা এক শক্তিশালী আকর্ষণের বলয়ের ভেতর গিয়ে পড়লো মহাকাশযান। এরপরে একে একে ঘটে গেল অকল্পনীয় সব ঘটনা। প্রকৃতি এও জানান দিল কখনোই তার বিরোধীতা করতে নেই। প্রকৃতির অভিপ্রায়ের কেউ অন্যথা করলে প্রকৃতি তাকে পরম যত্নে শাস্তি প্রদান করে। সেই শাস্তির নির্মতা যে কাউকেই স্তব্ধ করে দেবে।
আজও “অনন্ত নক্ষত্র বীথি” র কথা ভাবলে দুই বছর পূর্বের পাঠকালের অনুভূতিগুলো সমান তীব্রতায় নাড়া দেয় আমাকে। তবে দুবছরের এই সময়ের ব্যবধানে বইয়ের কিছু তথ্য স্মৃতিপটে ঝাপসা হয়ে যাওয়ায় রিভিউ লিখবার আগে পুন:পাঠের প্রয়োজন পড়ে। আর তখনই আবিষ্কার করলাম এক তাজ্জব সত্যি, বইয়ের কোথাওই মূল চরিত্রের নাম উল্লেখ করা হয়নি! লেখকের সৃষ্ট সেই ফ্যান্টাসির দুনিয়ায় প্রবেশ করে এতটাই আচ্ছন্ন হয়ে গিয়েছিলাম, যে এই সাধারণ বিষয়টুকুও খেয়াল করিনি তখন।প্যারালাল ইউনিভার্স, টাইম ডিলিউশনসহ কল্প ও বাস্তব বিজ্ঞানের জটিল উপাদানের সমন্বয়ে গড়ে উঠেছে গল্পটা। সেসবের সঙ্গে লেখক মানব মনের আবেগ-ভালোবাসার যেভাবে সংমিশ্রণ ঘটান সেটা অতুলনীয়। উপন্যাসের প্লটটা অসাধারণ ছিল, গল্পের গতিও ছিল সাবলীল। হুমায়ূন আহমেদের বর্ণনা বরারবরের মতই প্রাঞ্জল। ঘটনায় একের পর এক আসা অককল্পনীয় চমকগুলো বিস্ময়াভিভূত করে গল্পে ধরে রেখেছিল আমাকে। সুতীব্র আতংক আর উত্তেজনাও সেই সপ্রতিভ বিস্ময়ের সামনে ফিকে দেখায়৷ নামহীন মূল চরিত্রটির নিকির প্রতি ভালোবাসা হৃদয়ের গভীরে গিয়ে নাড়া দেয়। শেষাংশে প্রকৃতির সীমাহীন নির্মমতা স্তব্ধ করে দেয় আমাকে। মূল চরিত্রের শেষ পরিণতির কথা ভাবলে আজও মনটা মোচড় দিয়ে ওঠে।
ব্যক্তিগত রেটিং- ৮.৫/১০

বই রিভিউ :কুটু মিয়া
লেখক: হুমায়ূন আহমেদ
কুটু মিয়া।যদি আপনাকে প্রশ্ন করা হয় এই নামটা বা শব্দটার সাথে সর্বাধিক নিকট শব্দ কোনটি,তাহলে আপনি কি উত্তর দিবেন?নিশ্চই কটু।কটু থেকে কুটু।অর্থাৎ বিকট বা বিচ্ছিরি।আর সেই কটু বা কুটু মিয়াকে নিয়েই হুমায়ূন আহমেদের অনন্য ভৌতিক রহস্য উপন্যাস কুটু মিয়া।
কুটু মিয়া হচ্ছেন পেশায় একজন রাঁধুনি।বয়সে মধ্যবয়স্ক,লম্বা উশখুশ চুল,পাখির নখের মতো লম্বা নখ,এক চোখ কানা,গা থেকে সবসময় বিকট গন্ধ আসতে থাকে।মানে দেহের গড়ন,প্রকৃতি এমন যে হঠাৎ যদি কেউ অন্ধকারে তাকে দেখে তাহলে তার নির্ঘাত পিলে চমকে উঠবে।
কিন্তু রন্ধনশিল্পী হিসেবে তিনি দারুন।তিনি প্রায় সব ধরনের দেশি-বিদেশি রান্নাবান্না জানেন।সেই সুবাদেই তিনি এক পাইলটের বাসায় রান্না এবং চাকরের কাজ করতেন।এবং তার থেকে পাওয়া প্রশংশাপত্র নিয়েই তিনি এলেন পুরান ঢাকায় থাকা এক ছদ্ম নামধারী অখ্যাত লেখক আলাউদ্দিনের কাছে।সেই থেকেই কুটু মিয়ার কাহিনী শুরু।
‼️হালকা স্পয়লার এলার্ট‼️
কুটু মিয়ার আসার প্রথম দিন থেকেই কুটু মিয়ার রান্নার প্রেমে পরে যান আলাউদ্দিন।আস্তে আস্তে এমন অবস্থায় দাঁড়ায় যে তার হাতের বিষ খেলেও আলাউদ্দিনের যেন মনে হবে অমৃত।কুটু মিয়া তার বাসার সমস্ত কাজ করে দিয়ে রান্নাবান্না করে আলাউদ্দিন সাহেব কে খাবার দেন।তিনি রাতের খাবার খেয়ে আরামে ঘুমিয়ে পরেন।ঘুমিয়ে অদ্ভুত অদ্ভুত স্বপ্ন দেখেন কুটু মিয়াকে নিয়ে।
একদিন কুটু মিয়া ব্লাডেমেরী নামে এক অদ্ভুত শরবতের সম্পর্কে বলেন আলাউদ্দিন কে।তিনি প্রথমে সেই উদ্ভট শরবতের প্রস্তুত প্রণালি শুনে না করলেও একদিন খাওয়ার পর সেই শরবতের প্রেমে পরে যান তিনি। শরবত খেতে খেতে,সিগারেট কিংবা হুকা ধরিয়ে বাথটাবে শুয়ে স্নান করেন তিনি।এভাবেই চাকরের খেদমতে আরাম আয়েসে তার দিন কাটছিলো।এরমধ্যে আবার এই বুড়ো বয়সে এসে বিয়ে করেন আলাউদ্দিন।এরপর তিনি তার চাকরকে নিয়ে তার স্ত্রীর বাসায় উঠলে বাসার চারপাশে হঠাৎ কুকুরের উপদ্রব শুরু হয়।যা উপন্যাসটি সমাধানের জন্য আরো একটি মাত্রা যোগ করে।ধীরে ধীরে আলাউদ্দিন সাহেবের আলস্যের পরিমান যেমন বেড়ে যায় তেমনই তার অক্কা পাওয়ার সময় ও ততই এগিয়ে আসে।
একদিন তার সারা শরীরে ফোস্কা পরে গেল।সেই ফোস্কা দিয়ে পোকা বেরিয়ে সারা শরীর তার ঘুনেপোকার মতো খেয়ে ফেলা শুরু করল আর আলাউদ্দিন অলস চোখে কুটু মিয়ার চলে যাওয়ার দিকে তাকিয়ে রইল!
হুমায়ূন আহমেদের এই কুটু মিয়া উপন্যাসে সেই কুটু মিয়া কে,কি তার পরিচয়,কি তার উদ্দেশ্য,কেন হঠাৎ সেই কুকুরের উপদ্রব বাড়ল,এভাবে তার মনিবদের দেহে ফোস্কা পরার কারন ইত্যাদি জানতে হলে আপনাকে পড়ে ফেলতে হবে এই উপন্যাসটি।
উপন্যাসটি এককথায় অনেক ভালো লেগেছে আমার।কিন্তু কুটু মিয়ার এইরুপ কর্মকান্ডের কোনো উত্তর মিলে নি আমার কাছে।কুটু মিয়ার রহস্য ভেদ করতে পড়ে ফেলতে পারেন বইটি।বলতে পারি হতাশ হবেন না বইটি পরে বরং আবারো একবার কলম জাদুকরের মজাদার লেখনীর জাদুতে আবদ্ধ হতে বাধ্য হবেন!
পার্সোনাল রেটিং: ৪/৫
হ্যাপি রিডিং

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বুক রিভিউ
বই : মধ্যাহ্ন
লেখক : হুমায়ুন আহমেদ
“মধ্যাহ্নে ইতিহাস আছে, ঐতিহাসিকতা নেই”
ঐতিহাসিক না-হলেও এটি ইতিহাসাশ্রয়ী।”
একজন লেখক বা সাহিত্যিকের সৃষ্ট সাহিত্যকর্ম নিয়ে যেমন আলোচনার অন্ত্য থাকে না ; তেমনই তা সমালোচনারও বাহিরে যেতে পারে না। এই নিয়ম খুব সম্ভবত প্রকৃতিরই তৈরি নিয়ম। যা এযাবতকালে প্রত্যেক ভাল ও মন্দ কিংবা পছন্দ ও অপছন্দনীয় সকল সাহিত্যিকরাই এর স্বীকার হয়েছেন। প্রিয় হুমায়ুন আহমেদও তার ব্যতিক্রম ছিলেন না। প্রিয় এই লেখক অনেকের কাছেই খেয়ালি লেখক হিসেবে পরিচিত। কিন্তু খেয়ালি এই লেখকের হাতে সাহিত্যের কলম ধরা দেয়াতেই ‘ বই প্রেমী ‘দের সংখ্যা রাতারাতি বৃদ্ধি পেতে থাকে। কবি গুরু রবীন্দ্রনাথ কিংবা নজরুলের মত বর্ষীয়ান লেখকরাও সম্ভবত এত পাঠক তৈরি করতে পারেনি (তাঁরা যা পেরেছেন তা কিন্তু হুমায়ুন পারেনি। তুলনা করছি না, মত প্রকাশ করছি। পাঠকেরা ভিন্নভাবে নিবেন না।)
খুব বেশি বই এই জীবনে পড়েছি, এমনটা দাবী করি না তবে যে কজন লেখককেই পড়ে থাকি না কেন, তাদের কেউই হুমায়ুন আহমেদের মতন লিখতে পারে নাই, এত মোহনীয় লেখা, মায়া কাড়া গল্পের বিবারনের ধরন, পাঠকদের কে গল্প শেষ করার জন্য স্থির করে ধরে রাখা সব সব কিছু মিলিয়ে সত্যিই তিনি ছিলেন এক অদ্ভুত লেখক। রহস্যময় লেখকও বলা যেতে পারে। রহস্যময় এই জগতের তিনি একজন রহস্যময় লেখক ছিলেন। আর একজন লেখক আমার ঘুম কেড়ে নিয়েছিল তার নাম ‘আহমদ ছফা’। তাঁকে নিয়ে আমার মুগ্ধতার কথা অনেক লিখেছি। এমনটা ভাববার কারণ হিসেবে প্রিয় পাঠক সমাজ ধরে নিতে পারেন যে আমি একটু বেশিই হুমায়ুন প্রেমী। তাই প্রিয় এই লেখকের সমালোচনা কে পাশে রেখে এই বইয়ের কিছু পছন্দনীয় অনুভুতির কথা প্রকাশ করার চেষ্টা করব।
দীর্ঘ দুই মাস পরে আমি ‘মধ্যাহ্ন’ দিয়ে বুক রিভিউ লেখা শুরু করছি। কর্মব্যস্ততার মধ্য থেকে একটু একটু করে সময় নিয়ে চলমান রেখেছি পাঠক হওয়ার গতি পথকে। যখন ভাবছিলাম দীর্ঘ এই বিরতির আলস্য কাটাতে কি দিয়ে শুরু করা যায় ঠিক তখন প্রিয় রাকিব ভাইয়ের এক ফেসবুক পোস্ট থেকে সামনে আসে হুমায়ুন আহমেদের এই জনপ্রিয় ‘মধ্যাহ্ন’।পড়া শেষে মনে হচ্ছে লেখক এই বই অনেক ভাবনাচিন্তা করেই লিখেছে। প্রতিটি মতামত অতি সাবধানে তুলে ধরেছেন। সাধারণত তিনি খেয়ালি লেখাই বেশি লিখেছেন। কিন্তু ‘ মধ্যাহ্ন ‘ তে তিনি অনেক গবেষণা করেই লিখেছেন। প্রতিটি শব্দ চয়ন করেছেন অতি যত্নসহকারে। জাফর ইকবাল স্যার মধ্যাহ্ন নিয়ে মন্তব্য করতে গিয়ে বলেছেন – মধ্যাহ্নের মত এমন চমৎকার বই যে তার ভাই লিখেছে এটা অবিশ্বাস্য।
“হরিচরণ বললেন, এত বড় হাতি আর তুমি ছোটখাটো মানুষ। তোমার কথা কি মানে…?
কালু মিয়া বলল, জে কর্তা মানে। আমি তার চোখের সামনে থাকলেই সে ঠাণ্ডা থাকে। চোখের আড়াল হলেই অস্থির হয়।
এত বড় জন্তু বশ করলে কিভাবে..?
আদর দিয়ে। সব পশু আদর বুঝে। মানুষের চেয়ে বেশি বুঝে।
মানুষ কম বুঝে..?
জে কর্তা….
মানুষ কম বুঝে কেন..?
মানুষরে আদর করলে মানুষ ভাবে আদরের পেছনে স্বার্থ আছে। পশু স্বার্থ বুঝে না।”
মধ্যাহ্ন বই থেকে
Md Ariful Islam Rakib ভাইয়ের দেয়া এই পোস্ট দেখে আমার পাঠক মন মধ্যাহ্ন পড়ার জন্য অস্থির হয়ে ওঠে। আমারও হয়েছে তাই। কোন রকমে দুধের স্বাদ ঘোলে মেটানোর উপায় হিসেবে বেছেনিলাম PDF কে। অনেক ব্যস্ততার মধ্যেও দীর্ঘ দিন পরে পাঠক মনে এক তৃপ্তিময় বই শেষ করলাম। কিন্তু থেমে থেমে। মধ্যাহ্ন পড়া আরো তৃপ্তিময় হতো যদি একবাসাতে শেষ করা যেত। হুমায়ুন আহমেদকে ধীরে পড়া যায় না। এই লেখকের বই এক বসায় না পড়তে পারলে কেমন যেন অস্থির লাগে। তবুও তৃপ্তির অনুপাত একটু বেশিই, কেননা বইয়ের লেখক যে হুমায়ুন আহমেদ..!
গল্পের শুরুতেই লেখকের কয়েকটি লাইন চোখে পড়ার মত – “যে-কোন লেখায় হাত দিলেই মনে হয় – চেষ্টা করে দেখি সময়টাকে ধরা যায় কিনা। মধ্যাহ্নেও একই ব্যাপার হয়েছে। ১৯০৫ সনে কাহিনী শুরু করে এগুতে চেষ্টা করেছি। পাঠকরা চমকে উঠবেন না। আমি ইতিহাস লিখছি না। গল্পকার হিসেবে গল্পই বলছি।”
সত্যিই তাই। ‘ মধ্যাহ্ন ‘ কোন ইতিহাস নয় আবার সময়কে ধরাও নয়। মধ্যাহ্ন হচ্ছে ইতিহাস ও সময়ের মধ্যবর্তী অবস্থান। যেখানে লেখক একটি যুগের বা কালের ধর্মীয় ও সামাজিক প্রেক্ষাপটকে তুলে ধরেছেন। ইংরেজ শাসিত অখণ্ড ভারতবর্ষ, হিন্দু মুসলমানদের তীব্র দ্বন্ধ, কংগ্রেস – মুসলিম লীগের লড়াই, দেশভাগ, ভারতছাড় আন্দোলন, প্রথম ও দ্বিতীয় বিশ্বযুদ্ধ কত কিছুই না সংঘটিত হয়েছে। সেই সময়কে উপজীব্য করে এই সময় এই উপন্যাসটি রচিত হয়। সময় বা ইতিহাসের চেয়ে লেখক তার মধ্যাহ্নে সেই সময়কার মানুষের জীবন যাত্রা ও তাদের সেই চলমান জীবনের গল্পকেই বেশি প্রধান্য দিয়েছে।
সেই সমাজের বসবাসরত উচ্চবিত্ত, মধ্যবিত্ত, নিম্নবিত্ত ও সর্বহারাবিত্তদের হতাশা, কষ্ট, গ্লানি, মৃত্যুর গাথা এবং মানবিকতা, বিবেকবোধ ও বাস্তবতা অনুধাবনের এক উজ্জ্বল দৃষ্টান্ত উপস্থাপন করার প্রাণপণ চেষ্টা করেছেন। মানুষে – মানুষে, ধর্মে – ধর্মে, জাতিতে – জাতিতে সেই সময়কার যে বিভেদ, ভেদাভেদ, মানসিক ভাঙনের জোয়ার বয়ে চলেছ তারই স্পষ্ট চিত্রায়ন করেছেন ; লেখক তার কলমের ছোয়ায়। ভাটি অঞ্চলের মানুষের জীবনকে ক্যানভাস বানিয়ে তিনি একছেন সমগ্র বাংলার জীবন চিত্র। বিভিন্ন রঙের ব্যাবহারে জীবন্ত করে তুলেছেন সময়টাকে। ভালবাসা, ঘৃণা, স্বার্থপরতা, বিস্বাসঘাতকতা, সাম্প্রদায়িকতা, অসাম্প্রদায়িকতা, ধর্মভীতি, ধর্ম ব্যাবসা সব রকমের সহজাত মনুষ্য প্রবৃত্তি স্থান পেয়েছে লেখকের সাহিত্য তুলির আঁচরে।প্রচুর কাল্পনিক চরিত্রের পাশাপাশি লেখক অনেক বাস্তব চরিত্রকে এনে হাজির করেছেন ‘মধ্যাহ্ন” উপন্যাসে।
হরিচরণ বাবু, শশী মাস্টার, লাবুস, জুলেখা, ইমাম ইদ্রিস, ধনু শেখ, শশাংক পাল, জুলেখা, অম্বিকা, শরীফা এদেরকে মনে হয় চোখ বন্ধ করলেই দেখতে পাচ্ছি! উনিশশ সালের শুরুর দিককার পটভূমিতে লেখা এই বইয়ে লেখক একই সাথে রবীন্দ্রনাথ ঠাকুর, তারাশঙ্কর, বিভুতিভূষণ, নজরুল, জয়নুল আবেদীন থেকে শুরু করে আইনস্টাইন, মাদাম কুরি, মহাত্মা গান্ধী, নেতাজি সুভাষচন্দ্র এমনকি হিটলার মুসোলিনিদেরকেও এক সুতোয় গেঁথেছেন। তাঁদেরকে উপন্যাসের অংশ করে তুলেছেন লেখক দারুন দক্ষতায়।
যদিও বাংলা উপন্যাসের অন্যতম বৈশিষ্ট্য কাহিনী ও চরিত্রের আদি-মধ্য-অন্ত ধারাবাহিক বিস্তার। কিন্তু সেই অর্থে মধ্যাহ্ন কিছুটা খাপছাড়া ছিল। হুমায়ূন আহমদের অন্যান্য রচনার মতোই মধ্যাহ্ন কয়েকটি মানব চরিত্রের একটি উপভোগ্য উপাখ্যান। তবুও সাহিত্যের এই যাদুকর অতুলনীয় বিশ্বাসযোগ্যতা নিয়ে বয়ান করেছেন মানুষের অভিজ্ঞতা, কল্পনা, বিশ্বাস ও চিন্তার ভারসাম্যমণ্ডিত সংশ্লেষ।
“উঁচু বংশের কেউ যদি দেবদেবী কোলে নেয়া দেখে তাহলে তার জন্য উত্তম। সৌভাগ্য এবং রাজানুগ্রহ। নিম্নবংশের কেউ দেখলে তার জন্য দুর্ভাগ্য। সে হবে অপমানিত। রাজরোষের শিকার। তার ভাগ্যে অর্থনাশের যোগও আছে।”
ধবধবে সাদা চুলওয়ালা পঞ্চাশ বছরের যুবাপুরুষ হরিচরণ সাহার সকাল থেকেই বিক্ষিপ্ত মনোভাবের কারণ হচ্ছে অম্বিকা ভট্রাচার্য। গ্রামের একমাত্র শাস্ত্র জানা এই ব্রাম্মণ হরিচরণের দেখা স্বপ্নের ব্যাখ্যা করেন এভাবেই। তিনি হরিচরণকে নিরুম্বু উপবাসের জন্য পরামর্শ দিয়েছেন। নিরম্বু উপবাস হচ্ছে রোজা রাখার মত। সারাদিনে পানিও খেতে পারবে না। কেননা সে অজ্ঞান অপরাধ দ্বারা পরিবেষ্টিত। অপরাধ হচ্ছে দুই ধরনের- জ্ঞান অপরাধ এবং অজ্ঞান অপরাধ।
হরিচরণ সাহা স্বপ্নে যে অপরাধ করেছেন তা ছিল অজ্ঞান। এই জ্ঞান অপরাধের জন্য তাকে নিরম্বু উপবাস সহ বিপুল খরচে এক বিশাল পুজোর আয়োজন করতে হবে। কিন্তু একই দিনে সে জ্ঞান অপরাধও করে ফেলেছে।এক মুসলমান কাঠমিস্ত্রির ছেলে জহিরকে পানিতে ডুবে মরার হাত থেকে উদ্ধার করে ঠাকুর ঘরে নিয়েছে। এই জ্ঞান অপরাধে তাকে তার সমাজ সমাজ থেকে সমাজচ্যুত করেছে…! তার সাথে যারা বসবাস করে তারাও তার সাথে তার এই জ্ঞানমুলক অপরাধের শাস্তি পাবে। সমাজের সমস্ত সামাজিক আচার থেকে তারা বন্ধ,বয়কট করা হয়েছে তাদের কে, একজন মুসলমানকে তাদের দেবদেবীর ঘরে প্রবেশ করিয়ে। হিন্দু মুসলিমের এই ধর্মান্ধ প্রথার আর একটি উদাহরণ দেয়া যেতে পারে লেখকের ভাষায় —
” হরিচরণের প্রচণ্ড ইচ্ছে হচ্ছে ছেলেটাকে কোলে নিতে। কোলে নেবার জন্য সময়টা ভাল। আশেপাশে কেউ নেই। কেউ দেখে ফেলবে না। তিনি এক মুসলমান কাঠমিস্ত্রির ছেলেকে কোলে নিয়ে দাঁড়িয়ে আছেন – এই দৃশ্য হাস্যকর।”
এই উক্তি কোন গল্প নয়, নিছক কথার কথা নয় ; ২৩৯ পাতার প্রতিটি পাতায় পাতায় এই সাম্প্রদায়িক ও অসাম্প্রদায়িকতার এক উজ্জ্বল ও বাস্তব চিত্র ফুটে উঠেছে। চলমান বর্তমান সমাজেও অনেক জায়গায় দেখায় যায় যে হিন্দুরা মুসলমানদের বাসায় শুধু শুকনো খাবার খায়। এটা কি ধর্মীয় সচেতনতা নাকি গোঁড়ামিপূর্ণ জ্ঞান…!
হরিচরণ ও জহিরদের এই চরিত্র এখনো এই বর্তমান পৃথিবীতে অনেক জায়গায় বহমান। এই শিক্ষা ও বিজ্ঞানের যুগেও এই সমাজচ্যুত রেওয়াজ বহু জায়গায় বিদ্ধমান। খুব সম্ভবত এখনো ইন্ডিয়ার অনেক প্রদেশে এই চরিত্রের চিত্রায়ন হয়। বাংলাদেশেও এমন কিছু হিন্দু ধর্মের লোক রয়েছে যারা জাত পাত নিয়ে সমাজের মধ্য অস্থিরতার সৃষ্টি করে। এখনো বহু হিন্দু পরিবার তাদের এই মানসিক রোগকে আঁকড়ে ধরে তাদের ঐতিহ্যকে প্রমাণ করার চেষ্টা করে। পৃথিবীর মধ্য সবচেয়ে বেশি হিন্দুদের মধ্যই জাত প্রথা নিয়ে দাঙ্গার সৃষ্টি হয়। আর এই দাঙ্গার জন্য ইন্ডিয়া সবার আগে আগানো।
গল্পের অন্যতম কেন্দ্রীয় চরিত্র হরিচরণ এখন পাতালের ষষ্ঠ স্থানে পড়েছে। পাতালের রসাতলে। এই তলের নাকি কোন গতি নাই। হরিচরণও একটি সত্য কাজ ও সত্য যুক্তি বলায় রসাতলে পরেছে। সে সমাজ থেকে আলাদা হওয়ার পরে তাকে অনেক কিছু থেকেই অব্যাহতি নিতে হয়েছিল। গাভী পালন ছিল তার মধ্য অন্যতম। তার প্রশ্ন ছিল – ‘অন্যজাতের মানুষও গাভী পালন করে। আমার জাত গিয়েছে আমি গাভী পালন করতে পারবো না কেন..? লেখকের বান্ধবপুর গ্রামের মত এমন শশাংক রাজা আজও বিরাজমান।
গল্পের ৭৬ পাতায় এসে গল্পের এক চরিত্রের জন্য খুবই খারাপ লাগল। জুলেখা, জুলেখার অবিবেচনামুলক একটি ভুল সিদ্ধান্তের উপর আরেকটি ভুল সিদ্ধান্ত তার মস্তিষ্ককে আবদ্ধ করে রেখেছিল। তার সেই জেদ,রাগ তাকে নিষিদ্ধ পল্লীতে জায়গা করে দিল। চনচল প্রকৃতির এই সহজ স্বাভাবিক মেয়েটার জন্য সত্যিই বেদনাগ্রস্ত আমার পাঠক মন। লেখক যেন পাঠকদের আহত করার জন্যই জুলেখার সময়কে অসময় পরিণত করেছে। লেখকের এত এত উপস্থাপনের মাঝেও জুলেখার এই অনুভুতি আমাকে, আমার বিবেককে স্তব্ধ করেছে। কেন মানুষ এভাবে সিদ্ধান্ত গ্রহণ করে, কেন মানুষ কোন ঘটনা ঘটানোর আগে তা পূর্ণবিবেচনা করে না…? একটি ভুল, একটি রাগ, একটি শাসন প্রায়ই একটি জীবন ; জীবন থেকে মুছে দেয়।–
” চান বিবি (জুলেখা) প্রথম রোজগারের টাকায় তার ছেলে জহিরের জন্য জামা, জুতা কিনল। বান্ধবপুর জুম্মা মসজিদের ইমামের জন্য একটা তুর্কি ফেজ টুপি কিনল। শশী মাস্টারের জন্য কিনল নকশি করা সিলেটের শীতলপাটি। জিনিসগুলো হাতে নিয়ে সে কিছুক্ষণ কাঁদল। ভদ্রঘরের একটি মেয়ের স্থান হয়েছে রঙিলা বাড়িতে – এই ঘটনা বান্ধপুরে কোন আলোড়ন তুলল না। অনেক দিন এই বিষয়টি কেউ জানলই না।”
মধ্যাহ্নের প্রথম খন্ডে আর একটি বিষয় আমাকে স্তব্ধ করেছিল তা হচ্ছে হরিচরণ বাবুর মৃত্যু। মৃত্যুর আগে জহিরের নামে তার সমস্ত স্থাবর অস্থাবর দান করার যে প্রক্রিয়া তা ছিল অসম্ভব রকম স্পর্শকাতর। দুজন সাক্ষীর মধ্য মাওলানার সাথে একজন হিন্দু ও ছিলেন। বিপ্লবী হও সত্ত্বেও যে তার কথা রাখার প্রাণপণ চেষ্টা করেছে।
প্রথম খন্ড শেষ করার পরে রবীন্দ্রনাথের সেই বিখ্যাত ছোট গল্পের সংজ্ঞাটি মনে পড়ল —
“অন্তরে অতৃপ্তি রবে,
সাঙ্গ করিয়া মনে হবে,
শেষ হইয়াও হইল না শেষ!”
উপন্যাস হওয়া সত্ত্বেও ঠিক এমনটা মনে হচ্ছে। মনে হচ্ছে লেখক এর শেষ কি শেষ করবে….!

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‘স্বপ্ন নিয়ে এত অস্থির হওয়ার কিছু নেই। স্বপ্ন হচ্ছে অস্থির মস্তিষ্কের ফসল। অস্থিরমতিরাই স্বপ্ন দেখে। আর আলস্য অস্থিরতা তৈরি করে।’

‘হরিচরণের প্রচণ্ড ইচ্ছে হচ্ছে ছেলেটাকে কোলে নিতে। কোলে নেবার জন্য সময়টা ভাল। আশেপাশে কেউ নেই। কেউ দেখে ফেলবে না। তিনি এক মুসলমান কাঠমিস্ত্রির ছেলেকে কোলে নিয়ে দাঁড়িয়ে আছেন – এই দৃশ্য হাস্যকর।’

‘ধর্ম যুক্তিতে চলে না। ধর্ম চলে বিশ্বাসে। ধর্মের সপ্ত বাহনের এক বাহন হচ্ছে বিশ্বাবা।’

‘ধর্ম থেকে যে পতিত তার স্থান পাতালের রসাতলে। পাতালের সাত স্তর, যেমন – অতল, বিতল, সুতল, তলাতল, মহাতল, রসাতল ও পাতাল ; এই তলে যে পতিত তার গতি নাই।’

‘মাওলানা সাহেবকে দেখিয়ে নজরানা দেয়া বেয়াদবি ; আবার কোন নজরানা না দিয়ে চলে আসাও বেয়াদবি। ‘

‘জমিদার শ্রেনীর মানুষের বিলাস ত্রুটির মধ্য পরে না। জমিদাররা আমোদ ফুর্তি করবে না,তা কি হয়..!’

‘পুরুষমানুষ নটি বেটির কাছেও লজ্জা আশা করে।’

‘অম্বিকা ভট্রাচার্য বললেন, খাসির মাংসে কোন দোষ নাই। তবে মুসলমানদের বাড়ির মাংস বিধায় শোধন করতে হবে। শোধন করার খরচা যদি দাও তবে মাংস নিতে পারি।’

‘সময়ে চেনা, সময় না চেনা বুদ্ধিমান মানুষের লক্ষণ। ‘

‘মোহের কাছে পরাজিত হওয়া ঠিক না।’

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